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Elephantiasis (हाथीपांव) के घरेलू उपाय

ये बीमारी एक मच्छर  के काटने  कारण फैलती है, मच्छर के काटने से हमारे शरीर के अंदर कुछ प्रवेश कर जाता है। इस बीमारी से रोगी के शरीर में सूजन की समस्या हो जाती है उस के पैर हाथी के पैरों की तरह फूल जाते हैं। इस रोग से व्यक्ति की  शारीरिक रूप से ही  बल्कि मरीजों की मानसिक और आर्थिक स्थिति भी बिगड़ सकती है।

इस बीमारी को एलीफेंटिटिस भी कहा जाता है और इस को लसीका फाइलेरिया भी कहा जाता है क्योंकि फाइलेरिया शरीर की ग्रंथि  प्रणाली को प्रभावित करता है। यह रोग व्यक्ति के हाथ- पैरों के साथ ही जननांगों को भी नुकसान पहुंचा सकता है, इस बीमारी से बचने के कुछ घरेलू उपाय इस प्रकार है –

  1. लौंग के सेवन से – लौंग के सेवन से फाइलेरिया की बीमारी को ठीक किया जा सकता है, इसके लिए लौंग की चाय बनाकर पीने से बहुत आराम मिलता है इसके अलावा इसे भूनकर भी खाया जा सकता है इसके सेवन से इन्फेक्शन पैदा करने वाले बेक्टेरिअ को खत्म करने में मदद मिलती है।  
  2. काले अखरोट का तेल का सेवन – इसके लिए काले अखरोट के तेल को एक कप गर्म पानी में तीन से चार बूंदे मिलाकर पीने से इस समस्या से राहत मिलती है, इस मिश्रण  को दिन में दो बार पिया जा सकता है। अखरोट में  मौजूद गुणों के कारण परजीवी एंजाइम कम होने शुरू हो जाते है, नियमित रूप से अखरोट के सेवन से इस बीमारी को दूर किया जा सकता है। 
  3. विटामिन A युक्त आहार के सेवन से – फाइलेरिया की समस्या को दूर करने  के लिए हमें अपने रोज के खाने में कुछ आहार जैसे लहसुन, अनानास, मीठे आलू, शकरकंदी, गाजर और खुबानी आदि को शामिल करना चाहिए। इनमें विटामिन ए भरपूर मात्रा में होता है और इसमें  बैक्टरीरिया को मारने के लिए विशेष गुण भी होते हैं।
  4. आंवला के सेवन से – आंवला में विटामिन सी प्रचुर मात्रा में होता है। इसमें एन्थेलमिंथिंक (Anthelmintic) भी होता है जो कि घाव को जल्दी भरने और इन्फेक्शन को दूर करने में मदद करता है। इसलिए नियमित रूप से आंवला का सेवन करना चाहिए। 
  5. अश्वगंधा के सेवन से – अश्वगंधा शिलाजीत का मुख्य हिस्सा है, इसके सेवन से फाइलेरिया की समस्या को दूर किया जा सकता है। अश्वगंधा के नियमित सेवन से फाइलेरिया के कारण होने वाले  इन्फेक्शन को कम किया जा सकता है।
  6. ब्राह्मी के इस्तेमाल से – ब्राह्मी का उपयोग बहुत ही पुराने समय से ही बहुत सी बीमारियों के इलाज के लिए किया जाता  है। फाइलेरिया के इलाज के लिए ब्राह्मी को पीसकर उसका लेप बनाकर रोजाना अपने प्रभावित जगह पर लगाने से  रोगी सूजन कम हो जाती है।
  7. अदरक के सेवन से – फाइलेरिया की समय को दूर करने  के लिए सूखे अदरक का पाउडर या सोंठ का रोज गरम पानी के साथ  सेवन करना चाहिए। इसके सेवन से शरीर में मौजूद परजीवी नष्ट हो जाते हैं और मरीज को जल्दी ठीक होने में भी मदद मिलती है। 
  8. शंखपुष्पी के इस्तेमाल से – फाइलेरिया के उपचार के लिए शंखपुष्पी की जड़ को गरम पानी के साथ पीसकर पेस्ट तैयार करके  इस पेस्ट को प्रभावित स्थान पर लगाने से सूजन कम करने  में मदद मिलती है।
  9. कुल्ठी के इस्तेमाल से – इसके लिए कुल्ठी या हॉर्स ग्राम में ऐसी  मिट्टी का इस्तेमाल किया जाता जो चींटियों द्वारा निकाली गई होती है और इसमें अंडे के सफेद हिस्से को  मिलाकर पेस्ट बनके अपने  प्रभावित स्थान पर लगाने से दर्द और सूजन से राहत मिलती है। इसके इस्तेमाल से  घाव जल्दी भरते हैं और सूजन कम होती है। इससे घाव में मौजूद बैक्टीरिया भी खत्म हो  जाते हैं।
  10. रॉक साल्ट के इस्तेमाल से – इसके लिए  शंखपुष्पी और सौंठ के पाउडर में रॉक साल्ट मिलाकर, एक एक चुटकी रोज दो बार गरम पानी के साथ सेवन करना चाहिये, इसके सेवन से सूजन को कम किया जा सकता है और इन्फेक्शन भी नहीं बढ़ता ।

तो हम कह सकते है Elephantiasis  की समस्या के कारण होने वाले इन्फेक्शन को इन घरेलू उपायों की मदद से दूर किया जा सकता है, इसके अलावा हमें अपने खान -पान का पूरा ध्यान देना चाहिए और नियमित रूप से काले अखरोट के तेल, लहसुन, गाजर आदि विटामिन से भरपूर चींजो का सेवन करना चाहिए इनके सेवन से इन्फेक्शन और सूजन को कम करने में मदद मिलती है।

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