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Increase weight of Infant (शिशु का भार बढ़ाने) के लिए

Increase weight of Infant (शिशु का भार बढ़ाने) के लिए

हर माता-पिता के लिए अपने  शिशु का भार और  स्वास्थ्य और को लेकर चिंता बनी रहती है। ऐसे में वह कई बार अन्य बच्चों को अधिक स्वस्थ देखकर अपने शिशु की तुलना से करने लगते हैं। है।हर बच्चा एक दूसरे से अलग होता है और  उसका विकास, वजन बढ़ने की प्रक्रिया दूसरों से अलग होती  है।

अगर हमारा बच्चा चुस्त, तंदुरुस्त और सक्रिय है तो समज लें कि  बच्चा एकदम ठीक है और उसका विकास सही से हो रहा है। अगर ऐसा नहीं है तो ये चिंता का विषय बन जाता  है।

ऐसे में हमें  अपने बच्चे के खान-पान पर विशेष ध्यान देने की जरूरत  होती  है। बच्चों का वजन ठीक होना बेहद जरूरी होता है। शिशु का बजन सही न होने के कारण इन समस्यायों का सामना करना पड़ सकता है –

  1. अगर शिशु का विकास उम्र के हिसाब से  वजन में कमी कुपोषण को दर्शाती है।
  2. शिशु के वजन में कमी के कारण बच्चे में विकास धीमा होने लगता है और उसकी  शारीरिक प्रतिरोधक क्षमता सामान्य के मुकाबले काफी कमजोर होती  है।
  3. शिशु का बजन कम होने के कारण उसकी प्रतिरोधक क्षमता में कमी आ जाती है जिसके कारण  बच्चा कई गंभीर बीमारियों की चपेट में आसानी से आ सकता है। इसके अलावा उसके बार-बार बीमार होने की आशंका भी बढ़ जाती है।
  4. अगर हम अपने शीश के बजन की और ध्यान नहीं देते, तो कुछ मामलों में बच्चे की मौत होने का भी खतरा पैदा हो सकता है। इस बात का हमें पूरा ध्यान देना चाहिए इसलिए शिशु का बजन बढ़ाने के कुछ उपाय इस प्रकार है – 

एक शिशु के लिए भरपर पोषण केवल अपनी माँ के दूध से ही मिल सकता है, इससे  नवजात के कम वजन कि समस्या को दूर किया जा सकता है जो शिशु के बेहतर विकास के लिए जरूरी होता हैं। अपने  नवजात शिशु  को लगभग हर दो-दो घंटे में दूध पिलाना चाहिए और साथ ही यह सुनिश्चित करना चाहिए  कि बच्चे का पेट पूरी तरह से भरा है या नहीं।  इसके अलावा उसके मल त्याग पर भी विशेष ध्यान देनाचाहिए क्योंकि शिशु  दिन में 6 से 8 बार मल त्याग करता है, तो इसका मतलब यह है कि बच्चे को आवश्यक पोषण मिल रहा है। 

जन्म के छह माह बाद बच्चों को कई जरूरी पोषक तत्वों की आवश्यकता होती है, जो केवल  दूध पीने से नहीं मिल पाते। इसलिए,  छह माह से बड़े बच्चों को दूध के अलावा अनाज, दाल, सब्जियां, फल और घर में बने सीरियल्स खिलाने शुरू कर देना चाहिए।  

6 से 8 माह के बच्चों के आहार में फल प्रतिदिन 30 ग्राम और सब्जियां प्रतिदिन 480 ग्राम से अधिक नहीं शामिल करनी चाहिएं। वहीं, 8 माह से बड़े बच्चों को आप नरम और मुलायम आहार सीधे खाने के लिए दे सकते हैं। इसके अलावा इन कुछ ऐसे खाद्य पदार्थोंकि मदद से हम अपने शिशु के बजन को बढ़ा सकते है जोकि इस प्रकार है – 

  1. केला – बच्चों का वजन बढ़ाने के लिए केले को खाना  बहुत जरूरी है। ये एनर्जी, कार्बोहाइड्रेट और फैट का अच्छा स्रोत होता है। इन तीनों तत्वों की मदद से वजन बढ़ाने में मदद करती  है। इसके अलावा, इसमें प्रोटीन और फाइबर के साथ कई जरूरी मिनरल और विटामिन भी मौजूद रहते हैं, जो बच्चे के विकास में मदद करते  हैं। इसे स्मूदी, शेक, केक या पुडिंग बनाकर  बच्चे को खाने के लिए दिया जा सकता है।
  2. रागी  वजन बढ़ाने में मददगार है – रागी में  कैल्शियम व आयरन के साथ फाइबर, प्रोटीन और विटामिन भरपूर मात्रा में होते है और ये भी बच्चों के विकास के लिए जरूरी हैं। इसके अलावा, इसमें  एनर्जी, कार्बोहाइड्रेट और फैट भी होता है जो वजन बढ़ाने में सहायक होते हैं। ये आसानी से पच जाती है, इसलिए इसे  बच्चों के आहार में शामिल करना चाहिए, इसके लिए इसे हलवे या खिचड़ी में मिलाकर खा सकते हैं।
  3. ओट्स से बच्चे का वजन बढ़ाएं – इसमें एनर्जी, फैट और कार्बोहाइड्रेट तत्व  बच्चे का वजन बढ़ाने में सहायक होते हैं, वहीं इसमें विटामिन बी-6, फोलेट, राइबोफ्लेविन, थियामिन और नियासिन के साथ पोटैशियम, फास्फोरस, मैग्नीशियम और कैल्शियम होने के कारण बच्चे के विकास में मदद  करती है।
  4. आलू तंदुरुस्त बनाए –  इसमें एनर्जी व कार्बोहाइड्रेट के साथ कुछ मात्रा में फैट भी होता है, जो वजन बढ़ाने में मदद करता  है। इसके अलावा, कैल्शियम, मैग्नीशियम, आयरन, फास्फोरस और पोटैशियम के साथ इसमें विटामिन बी-6, सी, राइबोफ्लेविन, थियामिन, नियासिन और फोलेट भी मौजूद होते हैं, जो बच्चों के पोषण और विकास के लिए जरूरी होता है इसके लिए आलू का भरता बनाकर या उसे उबालकर दूध में मैश करके भी खिला सकते है। दाल, सब्जी या खिचड़ी के साथ भी इसे इस्तेमाल में लाया जा सकता है।
  5. शक्करकंद से बच्चे की सेहत बनाएं – आलू की ही तरह शक्करकंद को भी बच्चों के आहार में शामिल करना चाहिए।  इसे उबाल कर बच्चों को सीधा खिला सकते हैं या फिर  दूध के साथ मैश करके भी इसे बच्चों को खिला सकते हैं। इसमें एनर्जी और कार्बोहाइड्रेट  होने के कारण बच्चे का वजन बढ़ाने  में मदद करता  है। वहीं, कैल्शियम, पोटैशियम, आयरन और मैग्नीशियम के साथ विटामिन-सी, नियासिन व फोलेट और अन्य कई जरूरी विटामिन और पोषक तत्व भी इसमें भरपूर मात्रा में होते हैं, जो बच्चे के विकास में जरूरी होते हैं।
  6. दालें पोषण का खजाना हैं – इसमें आयरन, मैग्नीशियम, जिंक और फोलेट जैसे मिनरल और कई जरूरी विटामिन पाए जाते हैं। प्रोटीन मांसपेशियों को मजबूती प्रदान करता है।
  7. पनीर का सेवन करना चाहिए – इसमें कैल्शियम, फास्फोरस, पोटेशियम और सोडियम के साथ अधिकतर विटामिन थोड़ी-थोड़ी मात्रा में उपलब्ध होते हैं। यह बच्चे का वजन बढ़ाने में मदद करता है। पनीर के छोटे-छोटे टुकड़े काटकर बच्चों को खाने के लिए दिए जा सकते हैं। 
  8. ड्राई फ्रूट्स सेबच्चों का वजन बढ़ेगा – वजन बढ़ाने के लिए बच्चों के आहार में ड्राई फ्रूट्स शामिल करना चाहिए। दरअसल, इनमें एनर्जी भरपूर मात्रा में पाई जाती है, जो वजन बढ़ाने में सहायक होती है। 
  9. फ्रूट जूस के  सेवन से – बच्चों के आहार में फ्रूट जूस को शामिल करना चाहिए इससे भी वजन बढ़ाने में  मदद मिलती  है। इनमें एनर्जी, कार्बोहाइड्रेट और शुगर की आवश्यक मात्रा पाई जाती है। वहीं, इसे मिनरल और विटामिन का भी अच्छा स्रोत माना जाता है, जो बच्चे का वजन बढ़ाने के साथ-साथ उनके पोषण में भी मदद करता  है। इसलिए अपने  9 माह से बड़े बच्चों को गूदेदार फल सीधे खाने के लिए भी दे सकते हैं।

 तो हम कह सकते है कि अपने शिशु के बजन का ध्यान रखना चाहिए, हमें ये ध्यान देना चाहिए अगर शिशु ने दूध पिया है तो उसका पेट भर गया है या नहीं नहीं तो उसे पोषण नहीं मिल पायेगा और उकसा बजन नहीं बढ़ेगा शिशु की उम्र के साथ साथ उसका बजन और विकास भी बदलता रहता है।

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